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- अहंकार को जलाकर शुद्ध कर देगी यह 'पवित्र आग'! सद्गुरु से जानें क्या है गुरु की गोद का असली मतलब
अहंकार को जलाकर शुद्ध कर देगी यह 'पवित्र आग'! सद्गुरु से जानें क्या है गुरु की गोद का असली मतलब
इस वायरल वीडियो में आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने जीवन के विभिन्न चरणों में मिलने वाले सुकून पर चर्चा की है। वे बताते हैं कि जहाँ माँ की गोद सुरक्षा का प्रतीक है, वहीं प्रेमी का साथ भावनात्मक जुड़ाव है। हालांकि, गुरु की गोद इन सबसे अलग है। उनके अनुसार, यह एक 'आग' की तरह है जो शिष्य के भीतर के अज्ञान को जलाकर उसे एक नई चेतना की ओर ले जाती है, जिससे जीवन में वास्तविक बदलाव आता है।
माँ की गोद सुरक्षा और पोषण का अहसास कराती है - सद्गुरु
Photo Credit: Instagram
- प्रेमी की गोद से भी ऊपर है गुरु का स्थान
- सद्गुरु के अनुसार, गुरु की गोद एक 'पवित्र आग' के समान है
- माँ की गोद सुरक्षा और पोषण का अहसास कराती है - सद्गुरु
जीवन की भागदौड़ में हम सभी को कभी न कभी किसी के सहारे और सुकून की जरूरत होती है। बचपन में वह सहारा माँ की गोद होती है, तो जवानी में दोस्तों या प्रेमी का साथ। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक 'गुरु की गोद' का असल में क्या महत्व है? आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने इसी गहरे सवाल का जवाब बहुत ही खूबसूरती और सादगी से दिया है, जो आपके सोचने का तरीका बदल सकता है।
माँ की गोद का अहसास
सद्गुरु अपनी बात की शुरुआत करते हुए कहते हैं कि हमारी सबसे बुनियादी और गहरी याद माँ की गोद की होती है। यह वह जगह है जहाँ हमें सबसे ज्यादा आराम, सुरक्षा और पोषण मिलता है। एक नन्हे बच्चे के लिए माँ की गोद ही पूरी दुनिया होती है, जहाँ उसे किसी भी बात का डर या चिंता नहीं सताती। यह हमारे अस्तित्व की वह बुनियादी याद है जो ताउम्र हमें सुकून का अहसास कराती रहती है।
दोस्त और प्रेमी का साथ
जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हमारी जरूरतें और भावनात्मक अनुभव बदलने लगते हैं। फिर शायद हम किसी पुराने दोस्त की गोद में हंसी-मजाक और मौज-मस्ती ढूंढते हैं। इसके बाद जीवन में प्रेम का प्रवेश होता है और हम अपने प्रेमी या जीवनसाथी की गोद में सुकून और अपनापन तलाशते हैं। ये सभी अनुभव मानवीय संवेदनाओं और हमारे सामाजिक रिश्तों की गहराई को बखूबी दर्शाते हैं।
गुरु की गोद: एक पवित्र आग
लेकिन सद्गुरु यहाँ एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली बात कहते हैं। वे कहते हैं, "गुरु की गोद एक आग है।" अब आप सोच रहे होंगे कि आग क्यों? माँ की गोद तो ठंडा सुकून देती है, लेकिन गुरु की गोद को आग क्यों कहा गया? सद्गुरु समझाते हैं कि गुरु का काम शिष्य को सिर्फ दिलासा देना या सहलाना नहीं है, बल्कि उसके भीतर छिपे अज्ञान और अहंकार को जलाकर उसे पूरी तरह शुद्ध करना है।
बदलाव का अनूठा अनुभव
जब एक शिष्य गुरु के सानिध्य में आता है, तो वह केवल क्षणिक आराम के लिए नहीं आता। गुरु की यह 'पवित्र आग' शिष्य की पुरानी पहचान और उसकी कमियों को मिटाकर एक नई चेतना को जन्म देती है। यह आग शिष्य के जीवन में एक क्रांतिकारी बदलाव लाती है और उसे सत्य के मार्ग पर आगे ले जाती है। वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे सद्गुरु की बातें सुनकर वहां मौजूद लोग भावुक हो रहे हैं। यह वीडियो हमें याद दिलाता है कि गुरु का साथ जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
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