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क्या नॉन-वेज खाने से अशांत होता है मन? सद्गुरु ने बताया मांसाहार का शरीर पर असली असर

सद्गुरु ने अपने हालिया वीडियो में बताया है कि मांस केवल एक 'सर्वाइवल फूड' है। जब जानवरों को पता चलता है कि वे मारे जाने वाले हैं, तो उनके शरीर में डर के कारण कई हानिकारक एसिड्स बनते हैं। मांस खाने से ये रसायन हमारे शरीर में पहुँचते हैं, जिससे मानसिक अशांति और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं। सद्गुरु के अनुसार, बेहतर विकल्प होने पर मांसाहार से बचना ही मानसिक और शारीरिक शांति के लिए सही है।

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सद्गुरु ने मांसाहार को सिर्फ जीवित रहने का भोजन बताया है।

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • जानवरों को मारने से पहले उनमें डर के केमिकल बनने लगते हैं।
  • ये खतरनाक एसिड मांस के जरिए हमारे शरीर में पहुँचते हैं।
  • सद्गुरु के अनुसार ये भोजन मन को अशांत कर सकता है।

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अपनी डाइट पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते। क्या आपने कभी सोचा है कि आप जो खाना खा रहे हैं, वह आपके मन पर क्या असर डालता है? हाल ही में, मशहूर आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा बटोर रहा है। इस वीडियो में उन्होंने Meat को लेकर कुछ ऐसी बातें कही हैं जो शायद आपको सोचने पर मजबूर कर देंगी। सद्गुरु का यह नजरिया विज्ञान और आध्यात्मिकता का एक अनोखा मेल है, जो हमें हमारे खाने के प्रति सचेत करता है।

 सर्वाइवल फूड या चॉइस?

सद्गुरु का कहना है कि मांसाहार दरअसल एक 'सर्वाइवल फूड' है। यानी जब इंसान के पास खाने के लिए कुछ और न हो, तब यह जीवित रहने का एक तरीका हो सकता है। लेकिन आज के समय में हमारे पास खाने के ढेर सारे विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में, जब हमारे पास बेहतर और शाकाहारी विकल्प हों, तो मांसाहार करना शरीर के लिए उतना फायदेमंद नहीं होता। यह सिर्फ पेट भरने की बात नहीं है, बल्कि यह इस बारे में है कि वह भोजन हमारे तंत्र के साथ कैसे प्रतिक्रिया करता है।

जानवरों का डर और शरीर पर असर

सद्गुरु ने एक बहुत ही गहरी बात समझाई है। वे कहते हैं कि जब किसी जानवर को पता चलता है कि उसे मारा जाने वाला है, तो उसके शरीर के अंदर एक रासायनिक हलचल शुरू हो जाती है। यह डर एक 'केमिकल ज्वालामुखी' की तरह होता है। कम से कम 50% जानवर इस मानसिक संघर्ष और डर से गुजरते हैं। उनके शरीर में कई तरह के नेगेटिव एसिड्स बनने लगते हैं जो उनके मांस के रेशों में समा जाते हैं।

मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

जब हम उस जानवर का मांस खाते हैं, तो वे एसिड्स और रसायनों के अंश हमारे शरीर में भी चले जाते हैं। सद्गुरु बताते हैं कि जब हम इस तरह का भोजन करते हैं, तो हमारे मन में बेवजह के उतार-चढ़ाव होने लगते हैं। यह न केवल हमारे शरीर के लिए बुरा है, बल्कि हमारी मानसिक शांति को भी भंग करता है। यह वायरल वीडियो हमें याद दिलाता है कि भोजन केवल ऊर्जा का स्रोत नहीं है, बल्कि यह हमारे विचारों और भावनाओं को भी प्रभावित करता है। सद्गुरु की ये बातें उन लोगों के लिए एक नई दिशा हो सकती हैं जो अपनी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं।

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