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अर्जुन के तीर से भी ज्यादा ज़रूरी था श्रीकृष्ण का ये काम! सद्गुरु ने खोला 'ईश्वरीय कृपा' का सबसे बड़ा रहस्य

आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने महाभारत के एक प्रसंग के जरिए 'ईश्वरीय कृपा' का महत्व समझाया है। अर्जुन और कृष्ण के बीच हुए संवाद का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे द्रौपदी स्वयंवर में अर्जुन के कौशल के साथ-साथ कृष्ण का पानी को स्थिर रखना महत्वपूर्ण था। सद्गुरु का कहना है कि जीवन में केवल मेहनत और बुद्धि काफी नहीं है, बल्कि सही समय पर सही समझ और ईश्वरीय कृपा ही सफलता दिलाती है।

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सद्गुरु ने अर्जुन और कृष्ण के बीच हुई अनोखी बातचीत को साझा किया

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • मछली की आंख भेदने के पीछे क्या था असली रहस्य, सद्गुरु ने बताया
  • सद्गुरु ने समझाया कि सही समय पर सही समझ ही असली सफलता है
  • सद्गुरु ने अर्जुन और कृष्ण के बीच हुई अनोखी बातचीत को साझा किया

महाभारत की कहानियाँ हमें हमेशा कुछ नया सिखाती हैं, लेकिन जब इन कहानियों को सद्गुरु  जैसे आध्यात्मिक गुरु सुनाते हैं, तो उनका अर्थ ही बदल जाता है। हाल ही में सद्गुरु ने एक वीडियो साझा किया है जिसमें उन्होंने द्रौपदी के स्वयंवर के दौरान अर्जुन और भगवान कृष्ण के बीच हुए एक बेहद दिलचस्प संवाद का जिक्र किया है। यह कहानी हमें जीवन के उस गुप्त पहलू के बारे में बताती है जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।

अर्जुन की उलझन और कृष्ण का साथ

कहानी की शुरुआत होती है द्रौपदी के स्वयंवर से, जहाँ अर्जुन को छत पर घूमती हुई मछली की आंख को नीचे पानी में उसकी परछाई देखकर भेदना था। सद्गुरु बताते हैं कि जब अर्जुन इस कठिन चुनौती के लिए तैयार हो रहे थे, तब भगवान कृष्ण उन्हें निर्देश दे रहे थे। कृष्ण ने अर्जुन को समझाया कि अपना दाहिना पैर आगे रखो, खुद को स्थिर करो और धनुष को इस तरह पकड़ो। अर्जुन, जो पहले से ही एक महान धनुर्धर थे, थोड़े चिढ़ गए। उन्होंने कृष्ण से पूछा, 'मैं ये सब करूँगा, पर आप क्या करेंगे?'

स्थिर पानी और ईश्वरीय कृपा

इस पर कृष्ण ने जो जवाब दिया, वह जीवन का सबसे बड़ा सबक है। कृष्ण ने मुस्कुराते हुए कहा, 'मैं पानी को स्थिर रखूँगा।' सद्गुरु इस बात पर जोर देते हैं कि अर्जुन के पास कौशल और साहस तो था, लेकिन अगर नीचे पानी हिलता रहता, तो वह कभी मछली की आंख नहीं देख पाते। यहीं से 'ग्रेस' यानी ईश्वरीय कृपा  का महत्व शुरू होता है।

 कौशल के साथ कृपा का मेल

सद्गुरु कहते हैं कि जीवन में केवल कौशल, बुद्धि और ऊर्जा ही काफी नहीं होती। आप कितने भी बुद्धिमान क्यों न हों, लेकिन सही समय पर सही समझ का होना ही असली अंतर पैदा करता है। यही वह 'ग्रेस' है जो आपके जीवन को एक नई दिशा देती है। ईश्वरीय कृपा आपके प्रयासों में वह स्थिरता लाती है जिसकी आपको सबसे ज्यादा जरूरत होती है।

सफलता का असली सूत्र

सद्गुरु हमें याद दिलाते हैं कि हमारे जीवन में मेहनत और बुद्धिमानी का अपना स्थान है, लेकिन ईश्वरीय कृपा उस अदृश्य शक्ति की तरह है जो हमारे रास्ते को आसान बनाती है। यह कहानी हमें सिखाती है कि विनम्र रहना और उस असीम शक्ति पर विश्वास करना ही सच्ची सफलता की कुंजी है।

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