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परफ्यूम स्टोर में क्यों रखे होते हैं कॉफी बीन्स? जानिए इसके पीछे का विज्ञान
परफ्यूम स्टोर में कॉफी बीन्स का उपयोग नाक को 'रीसेट' करने के लिए किया जाता है, लेकिन विज्ञान इसे एक मनोवैज्ञानिक प्रभाव या मिथक मानता है। शोध बताते हैं कि कॉफी खुद एक तीव्र गंध है, जो नाक की थकान को कम करने के बजाय उसे बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, खुशबुओं के बीच अपनी बिना परफ्यूम वाली त्वचा को सूंघना या ताजी हवा लेना कहीं अधिक प्रभावी तरीका है।
परफ्यूम स्टोर में क्यों रखे होते हैं कॉफी बीन्स? जानिए इसके पीछे का विज्ञान
Photo Credit: Pixabay
- विज्ञान का फैसला: कॉफी बीन्स नाक को रीसेट नहीं करते, यह केवल भ्रम है
- एक्सपर्ट टिप: प्रोफेशनल परफ्यूमर्स अपनी कोहनी की त्वचा सूंघते हैं
- सही तरीका: एक बार में केवल 3-4 परफ्यूम ही सूंघें, ज्यादा नहीं
परफ्यूम स्टोर्स किसी 'सेंसरी हैवन' की तरह होते हैं धुंधली रोशनी, शानदार बोतलें और हवा में तैरती भीनी खुशबू। इस शांत और आकर्षक माहौल के बीच, परफ्यूम की बोतलों के पास अक्सर भुने हुए कॉफी बीन्स का एक छोटा कटोरा रखा होता है, जो ग्राहकों को उन्हें सूंघने के लिए आमंत्रित करता है। लेकिन इसके पीछे की कहानी क्या है? क्या यह वाकई हमारी इंद्रियों को 'रीसेट' करने में मदद करता है, या यह सिर्फ एक आकर्षक मिथक है?
एक परंपरा की शुरुआत:
परफ्यूम के बीच कॉफी बीन्स सूंघने की परंपरा का मूल रहस्यों से भरा है। कुछ लोग इसे 'हाई-एंड' परफ्यूमरियों से जोड़ते हैं, तो कुछ इसे ब्यूटी काउंटर्स द्वारा शुरू किया गया एक 'सेंसरी गिमिक' मानते हैं, जिसका उद्देश्य ग्राहकों को खुशबुओं के ओवरलोड के दौरान एक "रीसेट बटन" देना था। कारण जो भी हो, आज यह एक परंपरा बन गई है। माना जाता है कि कॉफी बीन्स पुरानी खुशबुओं को बेअसर कर नई खुशबू पहचानने की क्षमता लौटाते हैं।
गंध की थकान का विज्ञान
जब हम कई अलग-अलग परफ्यूम का परीक्षण करते हैं, तो हमारी नाक थक जाती है। इसे विज्ञान की भाषा में 'ऑल्फैक्ट्री फटीग' या आम भाषा में 'नोज ब्लाइंडनेस' कहा जाता है। हमारा मस्तिष्क अत्यधिक संवेदी इनपुट से बचने के लिए ब्रेक लेने लगता है, जिससे खुशबुओं के बीच अंतर करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। लेकिन सवाल वही है क्या कॉफी बीन्स वास्तव में इस थकान को मिटा सकते हैं?

Photo Credit: Pixabay
कॉफी बीन्स पर वैज्ञानिक फैसला:
'नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन' द्वारा 2011 में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि कॉफी, नींबू या यहाँ तक कि ताजी हवा सूंघने से भी हमारी सूंघने की क्षमता को रीसेट करने में कोई खास अंतर नहीं पड़ता। कॉफी की तेज खुशबू मस्तिष्क में एक 'मनोवैज्ञानिक रीसेट' का अहसास जरूर पैदा कर सकती है, लेकिन वैज्ञानिक रूप से यह प्रभावी नहीं है।
तो असल में क्या काम करता है?
प्रोफेशनल परफ्यूमर्स कॉफी बीन्स पर भरोसा नहीं करते। इसके बजाय, वे अपनी खुद की त्वचा या बिना परफ्यूम वाले कपड़ों को एक 'न्यूट्रल रेफरेंस पॉइंट' के रूप में इस्तेमाल करते हैं। यहाँ कुछ व्यावहारिक सुझाव दिए गए हैं:
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एक बार में केवल 3-4 परफ्यूम ही ट्राई करें।
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शुरुआती खुशबू परखने के लिए 'ब्लॉटर स्ट्रिप्स' का उपयोग करें।
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सूंघने की इंद्रियों को आराम देने के लिए छोटे ब्रेक लें।
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अपनी कोहनी के अंदरूनी हिस्से जैसी किसी न्यूट्रल जगह को सूंघें।
कॉफी बीन्स को सूंघना एक सुखद परंपरा हो सकती है, लेकिन यह आपकी इंद्रियों में कोई चमत्कारिक बदलाव नहीं लाएगी। यदि आपको यह पसंद है, तो इसे जारी रखें, लेकिन किसी जादुई 'रीसेट' की उम्मीद न करें। खुशबुओं की दुनिया की खोज एक यात्रा है; इसे समय दें। और अगर आपको ब्रेक की जरूरत है, तो शायद एक कप कॉफी पीना उसे सूंघने से कहीं ज्यादा संतोषजनक होगा।
लेखिका के बारे में
इशिता मिश्रा, 'फोंजी फोल्की' की सह-संस्थापक हैं। यह एक लग्जरी परफ्यूम ब्रांड है जो कलात्मकता और जुनून के साथ उत्कृष्ट खुशबुएं तैयार करता है। परफ्यूमरी के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने के प्रति उनका समर्पण उनके ब्रांड को सबसे अलग बनाता है
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