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डॉ. जय मदान का लाइफ लेसन: जानिए जीवन के 7 चक्रों का रहस्य और मेनिफेस्टेशन का सही तरीका

क्या आप भी मेनिफेस्टेशन का सही तरीका जानना चाहते हैं? डॉ. जय मदान के फिक्की फ्लो लखनऊ सेमिनार के इस वीडियो से समझिए ऊर्जा का विज्ञान। वे बताती हैं कि हमारी जिंदगी के 7 स्तर ही असल में हमारे '7 चक्र' हैं। इसके साथ ही उन्होंने ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा को पूरी तरह से ग्रहण करने के लिए एक बेहद खास टिप दी है कि सीखते समय कभी भी अपने हाथ-पैर क्रॉस करके नहीं बैठना चाहिए।

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डॉ. जय मदान का लाइफ लेसन: जानिए जीवन के 7 चक्रों का रहस्य और मेनिफेस्टेशन का सही तरीका

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • वास्तविक और साक्षात भावना का मतलब ही असली मेनिफेस्टेशन है
  • हमारे जीवन और शरीर के सात अलग-अलग स्तरों को '7 चक्र' कहते हैं
  • ज्ञान या ऊर्जा ग्रहण करते समय कभी भी हाथ-पैर क्रॉस करके न बैठें

लंदन डायरी और योग सत्रों के बाद अब बात करते हैं साक्षात ऊर्जा और मेनिफेस्टेशन के अंतर्संबंध की। फिक्की फ्लो लखनऊ  द्वारा आयोजित एक विशेष सेमिनार में मुख्य वक्ता के तौर पर पहुंचीं डॉ. जय मदान ने लोगों को जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और ब्रह्मांड की ऊर्जा को अपने भीतर सोखने के कुछ आसान नियम बताए हैं।

क्या है मेनिफेस्टेशन का असली मतलब?

डॉ. जय मदान ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि जो चीज 'साक्षात' है यानी जो हमारे सामने वास्तविक रूप में मौजूद है, वही शब्द का असली अर्थ मेनिफेस्टेशन है। उन्होंने जीवन की यात्रा को सात मंजिलों की एक इमारत के रूप में समझाया और कहा कि हमारी जिंदगी के ये जो 7 फ्लोर्स (सात स्तर) हैं, सनातन और आध्यात्मिक विज्ञान में इन्हीं को '7 चक्र' कहा जाता है। हमारे जीवन का सबसे बुनियादी और पहला चक्र 'मूलाधार चक्र' है, जो हमारे पूरे अस्तित्व को स्थिरता प्रदान करता है। इन चक्रों को समझने का मुख्य उद्देश्य हमारे जीवन में स्पष्टता  लाना है।

ऊर्जा और ज्ञान को ग्रहण करने का सही तरीका

अक्सर जब हम किसी सेमिनार, क्लास या गुरु के सामने बैठते हैं, तो अनजाने में अपने हाथ या पैरों को बांधकर बैठ जाते हैं। डॉ. जय मदान ने इस मुद्रा को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण चेतावनी दी है। उन्होंने बताया कि जब भी आप किसी ऐसी जगह पर बैठे हों जहाँ आपको कुछ सीखना हो या किसी सकारात्मक चीज को अपने भीतर समेटना  हो, तो आपको अपने हाथ और पैर कभी भी क्रॉस नहीं करने चाहिए

हाथ और पैरों को खुला और सीधा रखने से आपके शरीर के ऊर्जा केंद्र सक्रिय रहते हैं, जिससे आपके गुरु, ईश्वर या उस स्थान की दिव्य ऊर्जा बिना किसी बाधा के आपके भीतर प्रवेश कर पाती है।

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