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समंदर का बढ़ता तापमान खाली कर देगा आपकी जेब! CA रचना रानाडे ने समझाया 'अल नीनो' का कड़वा सच

मशहूर फाइनेंशियल एक्सपर्ट सीए रचना रानाडे ने अल नीनो और भारतीय अर्थव्यवस्था के बीच के गहरे संबंध को उजागर किया है। उन्होंने समझाया कि कैसे प्रशांत महासागर के तापमान में मामूली बढ़ोतरी भारत के मानसून को कमजोर कर सकती है। चूंकि भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि और खाद्य पदार्थों का बड़ा हिस्सा है, इसलिए अल नीनो का मतलब बढ़ती महंगाई और आर्थिक मंदी हो सकता है। रचना ने 'सुपर अल नीनो' के खतरों के प्रति भी आगाह किया है।

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सीए रचना रानाडे ने अल नीनो के पीछे का विज्ञान समझाया

Photo Credit: instagram

ख़ास बातें
  • तापमान 2°C बढ़ने पर इसे 'सुपर अल नीनो' कहा जाता है
  • सीए रचना रानाडे ने अर्थव्यवस्था पर इसके असर की चेतावनी दी
  • प्रशांत महासागर के तापमान में बदलाव ही अल नीनो है

क्या आप जानते हैं कि समंदर के पानी का गर्म होना आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है? मशहूर फाइनेंशियल एजुकेटर और इन्फ्लुएंसर सीए रचना रानाडे ने हाल ही में एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने El Niño के गंभीर प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया है। यह बदलाव न केवल मौसम को प्रभावित करता है, बल्कि भारतीय बाजार के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

क्या है ये अल नीनो?

रचना बताती हैं कि अल नीनो कोई तूफान या साधारण सूखा नहीं है, बल्कि प्रशांत महासागर के तापमान में होने वाला एक बड़ा बदलाव है। सामान्य साल में, हवाएं गर्म पानी को एशिया की ओर धकेलती हैं, जिससे भारत में अच्छा मानसून आता है। लेकिन अल नीनो के दौरान ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं और गर्म पानी दक्षिण अमेरिका की तरफ मुड़ जाता है। इससे भारत और एशिया के कई हिस्सों में मानसून कमजोर हो जाता है।

अर्थव्यवस्था पर सीधी चोट

भारत जैसे देश के लिए, जहां महंगाई दर (CPI) को मापने वाली टोकरी में लगभग 42% हिस्सा खाने-पीने की चीजों का है, वहां कमजोर मानसून एक बड़ा खतरा है। रचना का कहना है कि यह सिर्फ मौसम की बात नहीं है, बल्कि एक बड़ी आर्थिक घटना है। अगर बारिश कम होगी, तो फसलों की पैदावार कम होगी और देखते ही देखते खाने-पीने की चीजें महंगी हो जाएंगी, जिससे आम आदमी का बजट बिगड़ सकता है।

कैसे मापा जाता है इसे?

वैज्ञानिक इसे प्रशांत महासागर के अलग-अलग हिस्सों में मापते हैं, जिन्हें 'नीनो रीजन' कहा जाता है। रचना के मुताबिक, 'नीनो 3.4' वो बेंचमार्क है जिस पर पूरी दुनिया की नजर होती है। अगर इस खास इलाके में तापमान लगातार 5 महीनों तक 0.5°C से ज्यादा रहता है, तो आधिकारिक तौर पर अल नीनो घोषित कर दिया जाता है।

सुपर अल नीनो की चेतावनी

सबसे डरावनी बात है 'सुपर अल नीनो'। रचना बताती हैं कि अगर तापमान का यह अंतर 2°C को पार कर जाए, तो उसे सुपर अल नीनो कहा जाता है। यह स्थिति और भी भयानक सूखा और गंभीर आर्थिक चुनौतियां ला सकती है। सीए रचना रानाडे का यह वीडियो हमें याद दिलाता है कि कुदरत के छोटे से बदलाव भी हमारी अर्थव्यवस्था को कैसे हिला सकते हैं।

(Except for the headline, this story has not been edited by NDTV staff and is published from a press release)

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