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E85 फ्यूल क्या है? जानिए क्यों यह सस्ता है, लेकिन हर कार के लिए सही नहीं

फाइनेंस इन्फ्लुएंसर सीए सार्थक आहूजा ने भारत में लॉन्च होने वाले E85 फ्यूल के बारे में जानकारी साझा की है। यह फ्यूल सामान्य पेट्रोल की तुलना में लगभग 20 रुपये प्रति लीटर सस्ता है, इसलिए पहली नजर में यह पैसे बचाने वाला विकल्प लगता है। हालांकि, एथेनॉल की एनर्जी पेट्रोल से कम होने के कारण E85 इस्तेमाल करने वाले वाहनों की माइलेज भी कम हो सकती है, जिससे कुल खर्च में बहुत बड़ा अंतर नहीं पड़ता।

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भारत में E85 फ्यूल इस्तेमाल करने से पहले कार मालिकों को क्या जानना चाहिए?

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • E85 फ्यूल सस्ता है, लेकिन इसकी माइलेज पेट्रोल से कम होती है
  • यह सामान्य पेट्रोल कारों के लिए उपयुक्त नहीं है
  • सरकार का लक्ष्य तेल आयात कम करना और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना है

फाइनेंस इन्फ्लुएंसर सीए सार्थक आहूजा ने हाल ही में एक ऐसी जानकारी साझा की है, जो भारत के हर वाहन मालिक के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। देश के पेट्रोल पंपों पर E85 फ्यूल लाने की तैयारी की जा रही है। यह फ्यूल सामान्य पेट्रोल से लगभग 20 रुपये प्रति लीटर सस्ता बताया जा रहा है। E85 में 85% एथेनॉल और सिर्फ 15% पेट्रोल होता है। पहली नजर में यह पैसे बचाने वाला विकल्प लग सकता है, लेकिन इसकी पूरी तस्वीर समझना जरूरी है।

कम कीमत, लेकिन कम माइलेज भी

E85 फ्यूल का सबसे बड़ा पहलू इसकी माइलेज है। एथेनॉल की एनर्जी पेट्रोल की तुलना में लगभग 30% कम होती है। इसका सीधा असर वाहन की फ्यूल एफिशिएंसी पर पड़ता है और माइलेज करीब 20% तक घट सकती है। यानी आप फ्यूल तो सस्ता खरीदेंगे, लेकिन उतनी ही दूरी तय करने के लिए ज्यादा फ्यूल खर्च होगा। इसलिए सिर्फ प्रति लीटर कीमत देखकर फैसला लेना सही नहीं होगा।

सरकार E85 को क्यों बढ़ावा दे रही है?

सरकार का उद्देश्य तेल आयात कम करना, विदेशी मुद्रा की बचत करना और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना है। भारत में एथेनॉल उत्पादन की क्षमता मौजूद है और E85 जैसे फ्यूल के इस्तेमाल से कच्चे तेल पर निर्भरता कम की जा सकती है। इसके अलावा, एथेनॉल पेट्रोल की तुलना में कम प्रदूषण फैलाता है, जिससे यह पर्यावरण के लिए भी बेहतर विकल्प माना जाता है।

हर वाहन के लिए नहीं है E85

एक महत्वपूर्ण बात यह है कि E85 फ्यूल हर कार या बाइक के लिए उपयुक्त नहीं है। सामान्य पेट्रोल इंजन वाले वाहनों में इसका इस्तेमाल लंबे समय में इंजन को नुकसान पहुंचा सकता है, क्योंकि वे इतने अधिक एथेनॉल कंटेंट के लिए डिजाइन नहीं किए गए हैं। इसी वजह से ऑटो कंपनियां अब फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स पर काम कर रही हैं, जो E85 जैसे फ्यूल पर सुरक्षित तरीके से चल सकें। मारुति सुजुकी समेत कई कंपनियां इस दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।

ब्राजील मॉडल से सीख रहा है भारत

ब्राजील जैसे देशों में एथेनॉल आधारित फ्यूल का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया जा रहा है और वहां बड़ी संख्या में वाहन इसी फ्यूल पर चलते हैं। भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ना चाहता है, लेकिन इस बदलाव में समय लगेगा। फिलहाल वाहन मालिकों को यह समझना जरूरी है कि E85 तभी फायदेमंद होगा, जब उनका वाहन इसके अनुकूल हो।

E85 फ्यूल भविष्य की एक महत्वपूर्ण ऊर्जा पहल है, जो देश को तेल आयात पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। हालांकि, इसका फायदा तभी मिलेगा जब लोग सही जानकारी के साथ इसका इस्तेमाल करें और यह सुनिश्चित करें कि उनका वाहन इस फ्यूल के लिए उपयुक्त है।

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