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दूध के पैकेट का रंग और आपके पिंपल्स! क्या आप गलत दूध चुन रहे हैं? डॉ. जुश्या सरीन से जानें सच
डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. जुश्या सरीन ने बताया कि दूध के पैकेटों का रंग (नीला, हरा, नारंगी, मैजेंटा) उनमें मौजूद फैट की मात्रा दर्शाता है। मुहांसों से जूझ रहे लोगों के लिए वे चेतावनी देती हैं कि लो-फैट या स्किम्ड मिल्क पिंपल्स को बढ़ा सकता है क्योंकि यह इंसुलिन और तेल उत्पादन को बढ़ाता है। बेहतर त्वचा के लिए लो-फैट दूध से बचें और सीमित मात्रा में नीले या हरे पैकेट का चुनाव करें।
दूध के पैकेट का रंग और आपके पिंपल्स! क्या आप गलत दूध चुन रहे हैं? डॉ. जुश्या सरीन से जानें सच।
Photo Credit: Instagram
- रंगों से पहचानें दूध का फैट
- लो-फैट दूध से बढ़ते पिंपल्स
- स्किम्ड मिल्क के प्रति रहें सावधान
भारत में दूध के पैकेट अलग-अलग रंगों में आते हैं नीला, हरा, नारंगी और मैजेंटा। क्या आपने कभी सोचा है कि ये रंग केवल दिखावे के लिए नहीं हैं? प्रसिद्ध डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. जुश्या सरीन ने हाल ही में एक वीडियो के जरिए बताया कि दूध के इन रंगों का सीधा संबंध आपकी सेहत और खासकर आपकी त्वचा से है।
दूध के पैकेट के रंगों का मतलब
अमूल और मदर डेयरी जैसे बड़े ब्रांड्स एक कलर-कोडिंग सिस्टम का पालन करते हैं ताकि आप सेकंडों में सही दूध चुन सकें:
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नीला टोन्ड मिल्क, जिसमें लगभग 3% फैट होता है।
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हरा : स्टैंडर्डाइज्ड मिल्क , जिसमें लगभग 4.5% फैट होता है।
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नारंगी फुल क्रीम मिल्क , जिसमें लगभग 6% फैट होता है।
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मैजेंटा : डबल-टोन्ड मिल्क जिसमें लगभग 1.5% फैट होता है।
पिंपल्स और दूध का कनेक्शन
डॉ. जुश्या समझाती हैं कि दूध शरीर में 'इंसुलिन' और 'IGF-1' के स्तर को बढ़ा सकता है। ये दोनों तत्व त्वचा में तेल के उत्पादन को बढ़ाते हैं, जिससे रोमछिद्र बंद हो जाते हैं और मुहांसे या पिंपल्स निकलने लगते हैं।
एक चौंकाने वाला सच: लो-फैट दूध है ज्यादा खतरनाक!
अक्सर लोग वजन घटाने के लिए लो-फैट या स्किम्ड मिल्क चुनते हैं। लेकिन डॉ. जुश्या ने शोध का हवाला देते हुए एक चौंकाने वाली बात बताई है कम फैट वाला दूध मुहांसों के लिए फुल-फैट दूध की तुलना में अधिक जिम्मेदार पाया गया है। अध्ययन बताते हैं कि लो-फैट दूध पीने वालों में मुहांसों की समस्या अधिक देखी गई है।
पिंपल्स वाली त्वचा के लिए एक्सपर्ट सलाह
यदि आपकी स्किन 'एक्ने-प्रोन' (जिस पर जल्दी पिंपल्स आते हों) है, तो डॉ. जुश्या ये सुझाव देती हैं:
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मैजेंटा पैकेट (डबल-टोन्ड) से बचें: यह आपकी त्वचा के लिए स्थिति को और खराब कर सकता है।
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स्किम्ड मिल्क सीमित करें: लो-फैट दूध का सेवन कम से कम करें।
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संतुलन है ज़रूरी: अगर दूध पीना ही है, तो नीले या हरे पैकेट वाला दूध सीमित मात्रा में पिएं।
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Further reading: DR. JUSHYA, Dr. Jushya Bhatia, Dr. Jushya Bhatia Sarin
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