अनुष्का राठौड़ की सलाह: शादी के गहने खरीदने से पहले जरूर जान लें हीरों से जुड़े ये राज!
अगर आप भी वेडिंग शॉपिंग या आभूषण खरीदने की सोच रहे हैं, तो अनुष्का राठौड़ का यह वीडियो आपके लिए है। 'डी बियर्स' की डायमंड मास्टरक्लास से अनुष्का ने बताया कि कैसे 1 से 3.5 अरब साल पुराने प्राकृतिक हीरे अत्यधिक तापमान और दबाव में बनते हैं। वीडियो में उन्होंने पीले, हरे और बैंगनी हीरों के बनने के पीछे का विज्ञान समझाया है और साथ ही खानदानी विरासत (Heirloom) के रूप में हीरों के महत्व पर भी बात की है।
अनुष्का राठौड़ की सलाह: शादी के गहने खरीदने से पहले जरूर जान लें हीरों से जुड़े ये राज!
Photo Credit: Instagram
- अनुष्का ने 'डी बियर्स' की डायमंड मास्टरक्लास में हिस्सा लिया
- प्राकृतिक हीरे 1 से 3.5 अरब साल पुराने होते हैं
- दबाव और तापमान की विशेष स्थितियों में ही कार्बन हीरा बनता है
शादी-ब्याह का सीजन हो या कोई खास मौका, गहनों की खरीदारी हमेशा हमारी प्राथमिकता होती है। खासकर जब बात हीरों की आती है, तो हम उसकी चमक और खूबसूरती के दीवाने हो जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जो हीरा आपकी उंगली या गले की शोभा बढ़ाता है, उसका सफर कितना अनोखा और अरबों साल पुराना होता है? जानी-मानी कंटेंट क्रिएटर अनुष्का राठौड़ ने 'डी बियर्स' की एक खास नेचुरल डायमंड मास्टरक्लास अटेंड की, जहां उन्हें हीरों के बनने की प्रक्रिया और उनके विभिन्न रंगों के पीछे छिपे विज्ञान को करीब से जानने का मौका मिला।
रंग-बिरंगे हीरों का अनोखा विज्ञान
अनुष्का बताती हैं कि बाजार में मिलने वाले विभिन्न रंगों के हीरों का रंग किसी कृत्रिम तरीके से नहीं, बल्कि धरती के भीतर होने वाली प्राकृतिक हलचलों से तय होता है:
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पीले हीरे : जब नाइट्रोजन गैस डायमंड क्रिस्टल के साथ जुड़ जाती है, तब पीले हीरों का निर्माण होता है। ये धरती की सतह से लगभग 100 मील नीचे बनते हैं।
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हरे हीरे : हीरों की सतह जब लाखों सालों तक प्राकृतिक रेडिएशन और रेडियोएक्टिव खनिजों के संपर्क में रहती है, तो उन्हें हरा रंग मिलता है।
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बैंगनी हीरे : ये सबसे दुर्लभ हीरों में से एक होते हैं, जिनका रंग हाइड्रोजन या निकेल-नाइट्रोजन के डिफेक्ट्स के कारण आता है।
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नारंगी हीरे : इन्हें अपना खूबसूरत चमकीला रंग ऑक्सीजन से जुड़े डिफेक्ट्स के कारण मिलता है।
900°C से 1300°C का भारी तापमान
अनुष्का ने मास्टरक्लास के हवाले से बताया कि एक प्राकृतिक हीरा बनने के लिए पृथ्वी के भीतर 900°C से लेकर 1300°C तक के अत्यधिक तापमान और भारी दबाव की आवश्यकता होती है। यदि परिस्थितियां इससे अलग हों, तो कार्बन हीरे में बदलने के बजाय ग्रेफाइट का रूप ले लेता है वही ग्रेफाइट जिसका इस्तेमाल हम अपनी पेंसिल की नोक में करते हैं। ये अनमोल हीरे करीब 1 से 3.5 अरब साल पुराने होते हैं, जिन्हें ज्वालामुखी विस्फोट के जरिए पृथ्वी की ऊपरी सतह के करीब लाया जाता है।
खानदानी विरासत का महत्व
वीडियो के अंत में अनुष्का एक बेहद भावुक और व्यक्तिगत बात साझा करती हैं। वे कहती हैं कि वे खुद को बहुत भाग्यशाली मानती हैं क्योंकि उनके पास उनकी परदादी की शादी के समय के पारंपरिक आभूषण हैं, जो लगभग 80 से 100 साल पुराने हैं। अनुष्का कहती हैं कि वे भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाना चाहती हैं और ऐसे प्राकृतिक हीरों के आभूषण खरीदना चाहती हैं जिन्हें वे आने वाली पीढ़ियों को एक अनमोल विरासत के रूप में सौंप सकें।
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