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अपनी खुशी की चाबी दूसरों को न दें: सद्गुरु का असली मंत्र

आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने एक वायरल वीडियो में साझा किया कि अपनी आंतरिक शांति को दूसरों के व्यवहार से प्रभावित नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने बताया कि लोग कैसे पेश आते हैं, यह उनका चुनाव है, लेकिन हम कैसा महसूस करते हैं, यह हमारा अपना फैसला होना चाहिए। अपनी खुशी या गुस्से का अधिकार दूसरों को देना मानसिक गुलामी के समान है। सद्गुरु की यह सलाह सोशल मीडिया पर लोगों को आत्मनिर्भर और शांत रहने की प्रेरणा दे रही है।

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"दूसरे क्या करते हैं, यह उनकी पसंद है," बोले सद्गुरु

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • सद्गुरु ने बताया कि उनकी शांति उनके अपने हाथ में है
  • अपनी खुशी का कंट्रोल कभी किसी और को न दें
  • दूसरों के व्यवहार से दुखी होना मानसिक गुलामी जैसा है

क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग हर हाल में शांत कैसे रहते हैं? चाहे दुनिया इधर की उधर हो जाए, उनके चेहरे की मुस्कान नहीं जाती। दुनिया भर में अपने ज्ञान और प्रेरणादायक बातों के लिए मशहूर आध्यात्मिक गुरु, Sadhguru, एक बार फिर अपनी गहरी बातों से लोगों का दिल जीत रहे हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने एक ऐसी बात कही है जो शायद हम सभी के जीवन को पूरी तरह बदल सकती है। वीडियो में सद्गुरु बताते हैं कि लोग अक्सर उनसे पूछते हैं कि वह हर तरह के लोगों के साथ इतनी आसानी से कैसे काम कर लेते हैं, खासकर तब जब लोग उनसे अजीब और कड़वे सवाल पूछते हैं या गलत व्यवहार करते हैं।

सद्गुरु का अनोखा नजरिया

सद्गुरु का जवाब बहुत ही सीधा और गहरा था। उन्होंने कहा, "मेरा जीवन दूसरों के बारे में नहीं, बल्कि मेरे बारे में है।" उनका मानना है कि दूसरे लोग कैसा व्यवहार करते हैं, यह पूरी तरह से उनकी अपनी पसंद है। लेकिन मैं खुद को कैसा महसूस कराता हूँ, यह सिर्फ मेरी पसंद है। यह नजरिया हमें सिखाता है कि हमें अपनी खुशी की चाबी किसी और के हाथ में नहीं देनी चाहिए। अक्सर हम दूसरों के व्यवहार से परेशान होकर अपना मूड खराब कर लेते हैं, लेकिन सद्गुरु इसे एक बड़ी गलती मानते हैं।

मानसिक गुलामी से आजादी

वीडियो में उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने कभी किसी को यह हक नहीं दिया कि कोई उन्हें गुस्सा दिला सके, उन्हें खुश कर सके या उन्हें दुखी कर सके। उन्होंने इन सभी भावनाओं का 'प्रिविलेज' या अधिकार अपने पास ही रखा है। वह कहते हैं कि अगर कोई और यह तय कर रहा है कि आपके अंदर इस पल क्या हो रहा है, तो क्या यह सबसे बड़ी गुलामी नहीं है? अपनी भावनाओं पर अपना अधिकार रखना ही असली आजादी है।

खुश रहने का असली मंत्र

सद्गुरु हमें सलाह देते हैं कि हमें भी अपने जीवन में यही बदलाव लाना चाहिए। सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को खूब पसंद कर रहे हैं और इसे जीवन जीने का एक नया और सशक्त तरीका बता रहे हैं। अगर आप भी दूसरों की बातों को दिल पर लगा लेते हैं, तो सद्गुरु का यह वीडियो आपके लिए एक आई-ओपनर साबित हो सकता है। अंत में, वह यही संदेश देते हैं कि आपकी खुशी आपकी जिम्मेदारी है।

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