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गौरंग दास का युवाओं को संदेश: माता-पिता के सवालों में दखल नहीं, बल्कि प्यार छिपा है

मोटिवेशनल मेंटर गौरंग दास जी ने माता-पिता और बच्चों के बीच के बदलते रिश्तों पर एक गहरा संदेश दिया है। उनके अनुसार, जब माता-पिता हमारे जीवन या फोन के बारे में सवाल करते हैं, तो वे प्राइवेसी में दखल नहीं देते, बल्कि हमारी दुनिया का हिस्सा बनना चाहते हैं। बढ़ती उम्र के साथ वे भी अकेलेपन का सामना करते हैं। इसलिए, कुछ समय फोन को दूर रखकर उनके साथ जरूर बिताएं।

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गौरंग दास का युवाओं को संदेश: माता-पिता के सवालों में दखल नहीं, बल्कि प्यार छिपा है

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • माता-पिता शत्रु नहीं, वे आपकी दुनिया का हिस्सा बनना चाहते हैं
  • बढ़ती उम्र के साथ बुजुर्ग भी अकेलेपन का सामना करते हैं
  • स्मार्टफोन से नजरें हटाकर माता-पिता की बातें भी सुनें

अक्सर हर इंसान की जिंदगी में एक ऐसा दौर आता है, जब उसे अपने ही माता-पिता की बातें चुभने लगती हैं। बच्चों को लगने लगता है कि उनके माता-पिता उनके सबसे बड़े दुश्मन हैं, जो उनकी आजादी पर पहरा लगा रहे हैं। लेकिन जाने-माने मोटिवेशनल स्पीकर और आध्यात्मिक गुरु गौरंग दास ने इस नाजुक रिश्ते के पीछे छिपे गहरे सच को बहुत ही सरल शब्दों में उजागर किया है।

प्राइवेसी बनाम प्यार की चाह

एक आम उदाहरण देते हुए गौरंग दास कहते हैं कि जब आप अपने कमरे में बैठकर मोबाइल फोन देखते हुए अचानक मुस्कुरा रहे होते हैं और तभी माँ आकर पूछ लेती है, "किस बात पर मुस्कुरा रहे हो?", तो अधिकांश बच्चों को लगता है कि उनकी प्राइवेसी में दखल दिया जा रहा है।

लेकिन इसके पीछे की भावना को समझाते हुए वे कहते हैं कि माँ आपकी प्राइवेसी में खलल नहीं डालना चाहती, बल्कि वह केवल आपकी खुशियों और आपकी उस छोटी सी दुनिया का हिस्सा बनना चाहती है। जिसे बच्चे स्मार्टफोन के भीतर समेट लेते हैं, माता-पिता उसमें अपनी जगह तलाशते हैं।

पीढ़ी का अंतर और माता-पिता का अकेलापन

यह सच है कि आज की युवा पीढ़ी और उनके माता-पिता के बीच एक बड़ा जेनरेशन गैप  यानी वैचारिक अंतर हो सकता है। लेकिन हमें इस कड़वे सच को भी नहीं भूलना चाहिए कि वक्त के साथ माता-पिता बूढ़े हो रहे हैं और बच्चे बड़े हो रहे हैं।

गौरंग दास कहते हैं कि जिस तरह युवाओं को कभी-कभी लगता है कि उन्हें कोई समझने वाला नहीं है, ठीक वैसा ही अकेलापन और बेगानेपन का अहसास बुजुर्ग होते माता-पिता को भी होता है। वे भी अपनी ही संतान से संवाद करने के लिए तरसते हैं।

फोन को एक तरफ रखें और बातें करें

इस दूरी को मिटाने के लिए गौरंग दास ने एक बेहद सरल मगर असरदार उपाय बताया है। वे युवाओं से अपील करते हैं कि दिनभर में थोड़ा सा समय अपने माता-पिता के लिए भी निकालें। अपने स्मार्टफोन को कुछ देर के लिए एक तरफ रख दें और उनके पास जाकर बैठें।

ज़रूरी नहीं कि आपके पास हमेशा बोलने के लिए बड़ी बातें हों। यदि आपके पास कहने के लिए कुछ भी नहीं है, तो भी कोई बात नहीं। बस उनके पास बैठें और उनकी बातें सुनें। उनका हालचाल जानें और उन्हें यह महसूस कराएं कि वे अकेले नहीं हैं।

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