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सद्गुरु का कड़वा सच: दूसरों से बेहतर होने में खुशी ढूंढना एक बीमार मानसिकता है!
क्या आपकी खुशी भी दूसरों की तुलना पर टिकी है? आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने इस वीडियो में बताया है कि दूसरों को खुद से पीछे देखकर खुश होना एक बीमार मानसिकता है। जब तक आपकी खुशी का आधार यह रहेगा कि कोई आपसे बदतर स्थिति में है, तब तक आपकी जिंदगी खोखली रहेगी। सच्ची खुशी किसी काम को पूरे दिल से करने में है, न कि किसी दूसरे से बेहतर साबित होने में।
सद्गुरु का कड़वा सच: दूसरों से बेहतर होने में खुशी ढूंढना एक बीमार मानसिकता है!
Photo Credit: Instagram
- दूसरों से तुलना करके खुश होना एक मानसिक बीमारी है
- तुलना हटा दी जाए, तो ऐसे लोगों के पास कुछ नहीं बचता
- अपने काम के आनंद को ही अपनी असली खुशी बनाएं
आज के समय में इंसान की सबसे बड़ी समस्या यह नहीं है कि वह दुखी है, बल्कि समस्या यह है कि उसकी खुशी इस बात पर टिकी है कि दूसरा व्यक्ति उससे ज्यादा दुखी या असफल है। आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने अपने इस वीडियो में इसी तुलनात्मक मानसिकता पर गहरी चोट की है। वे बताते हैं कि कैसे आज दुनिया भर में लोगों ने आनंद की एक बहुत ही विकृत और बीमार परिभाषा बना ली है।
दूसरों से बेहतर होने की बीमारी
सद्गुरु कहते हैं कि आज दुनिया भर में लोगों के चेहरों को देखकर यह साफ समझा जा सकता है कि उनकी खुशी का एकमात्र कारण यह है कि वे किसी दूसरे से बेहतर कर रहे हैं। अगर वे किसी से ज्यादा पैसे कमा रहे हैं, किसी से बेहतर गाड़ी में घूम रहे हैं या किसी से ऊंचे पद पर हैं, तो ही वे खुद को खुश मान पाते हैं।
वे एक बहुत ही कड़वी बात कहते हैं, "अगर आप उनकी जिंदगी से इस तुलना को हटा दें, तो उनके पास अपनी जिंदगी में खुश होने के लिए असल में कुछ नहीं बचेगा।" उनका पूरा अस्तित्व ही दूसरों को नीचा या खुद से पीछे देखने पर टिका हुआ है।
"कोई आपसे बदतर स्थिति में है" क्या यह खुशी है?
सद्गुरु इस सोच को और गहराई से समझाते हुए कहते हैं कि आसान शब्दों में कहें तो, आज लोगों का एकमात्र सुख इस बात में है कि "कोई दूसरा उनसे भी बदतर स्थिति में जी रहा है।" वे सवाल उठाते हैं कि यह कितनी बीमार और घटिया मानसिकता है? किसी और की लाचारी, असफलता या कमजोरी को देखकर अपने भीतर संतुष्टि का भाव लाना एक स्वस्थ इंसान की निशानी नहीं हो सकती। वे दर्शकों को चेतावनी देते हुए कहते हैं कि अपनी जिंदगी में कभी भी इस स्तर पर मत गिरना।
सच्ची खुशी क्या है?
सद्गुरु जीवन जीने का सही नजरिया देते हुए कहते हैं कि जब आप कोई काम करते हैं, तो वह काम इसलिए खूबसूरत और आनंददायक होना चाहिए क्योंकि आप उसे कर रहे हैं। आपके काम की खूबसूरती इस बात से तय नहीं होनी चाहिए कि कोई दूसरा उसे आपके जितना अच्छा नहीं कर पा रहा है।
सद्गुरु का यह स्पष्ट संदेश पहले भी उनके प्रेरणादायक विचारों में देखा गया है, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि आत्म-साक्षात्कार और स्वयं की पूर्णता ही खुशी का एकमात्र स्रोत होनी चाहिए। किसी अन्य मनुष्य के पिछड़े होने या दुखी होने से मिलने वाला सुख कभी भी किसी इंसान की खुशी का जरिया नहीं होना चाहिए।
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