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पूर्वोत्तर की धड़कन: कोहिमा के बाजारों से लेकर खूबसूरत पहाड़ियों तक, कुछ ऐसा रहा इस ऐतिहासिक शहर का सफर

ओरीफ्लेम द्वारा प्रस्तुत 'Whosthat360 नॉर्थईस्ट इन्फ्लुएंसर यात्रा' के तहत कंटेंट हेड जयवीर सिंह नगालैंड की राजधानी कोहिमा पहुंचे। जयवीर के अनुसार, कोहिमा को समझने के लिए हफ़्तों नहीं, बल्कि सिर्फ आपका पूरा ध्यान चाहिए। उन्होंने एक ही दिन में कोहिमा के युद्ध स्मारक की शांति, बाजारों की पारंपरिक लकड़ी की कारीगरी और यहां की कुदरती सुंदरता को करीब से देखा और महसूस किया।

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पूर्वोत्तर की धड़कन: कोहिमा के बाजारों से लेकर खूबसूरत पहाड़ियों तक, कुछ ऐसा रहा इस ऐतिहासिक शहर का सफर

ख़ास बातें
  • ऐतिहासिक शहर का सफर
  • अद्भुत कला और हसीन वादियों का अनूठा संगम
  • हसीन वादियों की गहराई

पूर्वोत्तर भारत की खूबसूरती को दुनिया तक पहुँचाने के लिए शुरू हुई Whosthat360 नॉर्थईस्ट इन्फ्लुएंसर यात्रा अब नगालैंड की पहाड़ियों के बीच बसे खूबसूरत शहर कोहिमा पहुँच चुकी है। ओरीफ्लेम द्वारा प्रस्तुत इस यात्रा में Whosthat360 के कंटेंट हेड जयवीर सिंह खुद इस सफर का हिस्सा हैं। जयवीर का मानना है कि कोहिमा उन शहरों में से नहीं है जो आपको प्रभावित करने की जल्दी में हों, बल्कि यह धीरे-धीरे अपनी परतें खोलता है। उन्होंने इस शहर को महज एक दिन में जिया और महसूस किया।

युद्ध कब्रिस्तान: जहाँ शांति बहुत कुछ कहती है
जयवीर के दिन की शुरुआत कोहिमा के वॉर सिमेट्री से हुई। सुबह की हल्की धुंध और वहां की खामोशी एक अलग ही सम्मान का अहसास कराती है। वहां लिखे मशहूर शब्द "जब तुम घर जाओ, तो उन्हें हमारे बारे में बताना और कहना कि उनके कल के लिए, हमने अपना आज दे दिया" ने जयवीर को अंदर तक झकझोर दिया। उनके अनुसार, कोहिमा युद्ध का महिमामंडन नहीं करता, बल्कि उसे गरिमा के साथ याद रखता है।

बाजारों का जादू और लकड़ी की कारीगरी
जैसे-जैसे दिन चढ़ा, जयवीर कोहिमा के स्थानीय बाजारों में घूमे। यहां की संस्कृति कांच की दीवारों के पीछे नहीं, बल्कि रोजमर्रा के जीवन में रची-बसी है। लकड़ी की शानदार कारीगरी, हाथ से बने शॉल हुक और पारंपरिक नगा डिजाइन यहां की पहचान हैं। जयवीर बताते हैं कि कोहिमा के लोग बहुत खुले दिल के हैं। वहां के लोगों के साथ हुई बातचीत और उनकी मुस्कान एक कहानीकार के लिए सबसे कीमती अनुभव रहा।

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वादियां जो सांस लेती हैं
दोपहर के समय कोहिमा का एक अलग ही रूप सामने आया। चारों तरफ फैली हरियाली और ऊंचे-नीचे पहाड़ ऐसा अहसास कराते हैं जैसे कुदरत आपके बिल्कुल करीब हो। जयवीर ने कुछ पल के लिए अपने फोन को किनारे रखा और बस उन पहाड़ियों के बीच से गुजरते बादलों को देखा। कोहिमा की साफ हवा और सुकून भरा माहौल खुद-ब-खुद आपको रुकने और जिंदगी को धीमे अंदाज में जीने के लिए कहता है।

यह सफर सिर्फ घूमने की जगहों की लिस्ट पूरी करना नहीं था, बल्कि यह एक अहसास था। इन्फ्लुएंसर यात्रा के दौरान कोहिमा ने उन्हें सिखाया कि हर कहानी चिल्लाकर नहीं कही जाती; कुछ कहानियां पहाड़ियों की खामोशी, हाथों के हुनर और इतिहास के पन्नों में धीरे से फुसफुसाती हैं। जयवीर के शब्दों में, कोहिमा वह शहर नहीं है जिसे आप बस देख कर छोड़ दें, यह वह शहर है जिसे आप अपने अंदर उतार लेते हैं।

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