3,000 सीढ़ियों का कठिन सफर और 'डबल डेकर' पुल: नॉर्थ-ईस्ट यात्रा
शिलांग के पास स्थित मावलिननॉन्ग गाँव अपनी बेमिसाल सफाई और शांति के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। यहाँ की संस्कृति हर यात्री को प्रकृति के करीब लाती है। वहीं, नोंगिरियात का सफर 3,000 पत्थर की सीढ़ियों और घने जंगलों के बीच से होकर गुज़रता है। यहाँ खासी समुदाय द्वारा तैयार किया गया 'लिविंग रूट ब्रिज' प्राकृतिक इंजीनियरिंग का एक चमत्कार है, जो सदियों की परंपरा और पर्यावरण के प्रति सम्मान को दर्शाता है।
3,000 सीढ़ियों का कठिन सफर और 'डबल डेकर' पुल: नॉर्थ-ईस्ट यात्रा
- मावलिननॉन्ग: एशिया का सबसे साफ़ गाँव
- नोंगिरियात: 3,000 सीढ़ियों के रोमांचक सफर
- लिविंग रूट ब्रिज: खासी समुदाय की अद्भुत प्राकृतिक इंजीनियरिंग का नमूना
ओरिफ्लेम' द्वारा प्रस्तुत 'Whosthat360 नॉर्थ-ईस्ट इन्फ्लुएंसर यात्रा' अब शिलांग के शहरी शोर से निकलकर मेघालय की उन वादियों में पहुँच चुकी है, जहाँ प्रकृति और परंपरा का अद्भुत मेल दिखता है। इस सफर के दौरान Whosthat360 के कंटेंट हेड जयवीर सिंह ने मावलिननॉन्ग और नोंगिरियात के अपने बेहद निजी और प्रेरणादायक अनुभवों को साझा किया है।
मावलिननॉन्ग: जहाँ सफाई एक रस्म नहीं, संस्कार है
शिलांग से कुछ घंटों की दूरी पर स्थित मावलिननॉन्ग को 'एशिया का सबसे साफ़ गाँव' कहा जाता है। जयवीर सिंह बताते हैं कि यहाँ पहुँचते ही जो चीज़ सबसे पहले प्रभावित करती है, वह कोई इमारत नहीं बल्कि वहाँ का सन्नाटा और स्वच्छता है। यहाँ कोई प्लास्टिक या कचरा नहीं दिखता; बस पत्थर के रास्ते, बांस के डस्टबिन और खिलते हुए फूल नज़र आते हैं।
यहाँ के लोग रास्तों को साफ़ करना अपनी दिनचर्या मानते हैं। यह सफाई किसी सरकारी अभियान का हिस्सा नहीं, बल्कि उनकी संस्कृति का आधार है। यहाँ के स्काई व्यू पॉइंट से दिखने वाली बांग्लादेश की हरी-भरी मैदानी सीमा यात्रियों को गहरी शांति का अहसास कराती है।

नोंगिरियात का सफर: 3,000 सीढ़ियाँ और जज्बा
शांति के बाद बारी आती है रोमांच की। नोंगिरियात गाँव की ओर जाने वाला रास्ता किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। यहाँ मशहूर 'डबल डेकर लिविंग रूट ब्रिज' तक पहुँचने के लिए पत्थर की 3,000 से अधिक सीढ़ियाँ उतरनी पड़ती हैं। यहाँ कोई शॉर्टकट नहीं है, बस धैर्य और पानी के छोटे ब्रेक ही सहारा बनते हैं। जैसे-जैसे आप नीचे उतरते हैं, गाड़ियों का शोर परिंदों की चहचहाहट और झरनों की आवाज़ में बदल जाता है।
नेचुरल आर्किटेक्चर: डबल डेकर रूट ब्रिज
जब आप अंततः 'डबल डेकर लिविंग रूट ब्रिज' को देखते हैं, तो वह अनुभव Surreal लगता है। यह पुल बनाया नहीं गया, बल्कि 'उगाया' गया है। खासी समुदाय ने दशकों की मेहनत से पेड़ों की जड़ों को इस तरह मोड़ा और संवारा है कि वे मज़बूत पुल बन गए। यह Ecological wisdom की एक बेहतरीन मिसाल है। पास के ठंडे प्राकृतिक कुंड में एक डुबकी सारी थकान मिटा देती है।

यह यात्रा क्यों है खास?
जयवीर सिंह के अनुसार, मावलिननॉन्ग की जागरूक जीवनशैली से लेकर नोंगिरियात की 'लिविंग इंजीनियरिंग' तक, यह यात्रा केवल सैर-सपाटा नहीं है। यह समझना है कि मेघालय के लोग प्रकृति का कितना सम्मान करते हैं। आप भले ही शारीरिक रूप से थककर लौटते हैं, लेकिन मानसिक रूप से बहुत हल्का और प्रेरित महसूस करते हैं। कुछ जगहें न केवल खूबसूरती दिखाती हैं, बल्कि दुनिया को देखने का नज़रिया भी बदल देती हैं।
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