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आलिया भट्ट की 9 घंटे की नींद पर सद्गुरु का सवाल: इतना सोओगी तो जियोगी कब

आलिया भट्ट ने बताया कि वे अपनी मानसिक शांति और ऊर्जा के लिए रोज 9 घंटे की नींद लेती हैं। इस पर सद्गुरु ने मजाकिया लहजे में पूछा, "अगर इतना सोओगी तो जियोगी कब?" सद्गुरु ने समझाया कि नींद शरीर की मरम्मत के लिए जरूरी है, लेकिन अगर जीवन आनंदमय और जीवंत हो, तो नींद की जरूरत कम हो जाती है। यह चर्चा दिखाती है कि कैसे आधुनिक स्वास्थ्य नियम और योग दर्शन नींद को अलग-अलग नजरिए से देखते हैं।

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आलिया भट्ट की 9 घंटे की नींद पर सद्गुरु का सवाल: "इतना सोओगी तो जियोगी कब?"

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • आलिया का नियम: अभिनेत्री खुद को फिट रखने के लिए रोज 9 घंटे सोती हैं
  • सद्गुरु का सवाल: अगर जीवन का बड़ा हिस्सा सोने में बीता, तो जियोगी कब
  • नींद का विज्ञान: शरीर को घंटों की गिनती नहीं, बल्कि गहरे आराम की जरूरत है

हाल ही में हुए एक पॉडकास्ट में बॉलीवुड की 'पावरहाउस' अभिनेत्री आलिया भट्ट और आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु के बीच एक ऐसी बहस हुई, जिसने इंटरनेट पर स्वास्थ्य और जीवनशैली को लेकर एक नई चर्चा छेड़ दी है। इस बार मुद्दा 'असफलता' नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की 'नींद' थी।

आलिया भट्ट का 9-घंटे का फॉर्मूला
आलिया भट्ट, जो अपनी व्यस्त शूटिंग शेड्यूल और माँ के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाती हैं, ने साझा किया कि वे अपनी नींद के साथ कभी समझौता नहीं करतीं। उन्होंने बताया कि वे दिन में कम से कम 9 घंटे की नींद लेने की कोशिश करती हैं। आलिया के अनुसार, उनके काम में बहुत अधिक मानसिक और शारीरिक ऊर्जा लगती है, और 9 घंटे की नींद उन्हें अगले दिन के लिए तरोताजा और केंद्रित (Focused) महसूस कराती है। आज के समय में, जहाँ डॉक्टर 7-8 घंटे की नींद की सलाह देते हैं, आलिया का यह नियम एक स्वस्थ और अनुशासित जीवनशैली का हिस्सा लगता है।

सद्गुरु का 'कड़वा' लेकिन दिलचस्प सच
आलिया की बात सुनकर सद्गुरु ने एक ऐसा सवाल किया जिसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में लेकिन गंभीरता के साथ पूछा, "अगर आप हर दिन 9 घंटे सोती हैं, तो इसका मतलब है कि आप अपनी जिंदगी का एक-तिहाई हिस्सा सोने में बिता रही हैं। ऐसे में आप जियोगी कब?"

सद्गुरु ने समझाया कि लोगों को लंबी नींद की जरूरत इसलिए पड़ती है क्योंकि वे "मरे हुए" की तरह थक जाते हैं। उनके अनुसार, नींद कोई 'कोटा' या 'नियम' नहीं है जिसे पूरा करना जरूरी हो। यह शरीर की एक आवश्यकता है जो इस बात पर निर्भर करती है कि आप दिन भर कितनी शांति और जीवंतता के साथ काम करते हैं। सद्गुरु का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति योग और ध्यान के माध्यम से अपने शरीर को 'आराम की स्थिति'  में रखना सीख जाए, तो उसकी नींद की जरूरत अपने आप कम हो जाएगी।

नींद vs आराम: असली अंतर क्या है?
सद्गुरु ने इस बात पर जोर दिया कि शरीर को 'नींद' की नहीं, बल्कि 'आराम' की जरूरत होती है। यदि आप दिन भर तनाव में रहते हैं, तो शरीर को मरम्मत के लिए ज्यादा समय चाहिए। लेकिन अगर आप अपनी ऊर्जा को सही तरीके से मैनेज करना सीख लें, तो कम नींद में भी आप अधिक सक्रिय रह सकते हैं।

यह बातचीत हमें दो अलग-अलग दुनियाओं से रूबरू कराती है। एक तरफ आलिया भट्ट हैं, जो आधुनिक स्वास्थ्य मानकों और उत्पादकता के लिए लंबी नींद को जरूरी मानती हैं। दूसरी तरफ सद्गुरु हैं, जो 'चेतना' और 'जीवंतता' के माध्यम से नींद पर जीत हासिल करने की बात करते हैं। अंततः, यह चर्चा हमें याद दिलाती है कि जीवन की गुणवत्ता केवल इस बात में नहीं है कि हम कितने घंटे काम करते हैं, बल्कि इस बात में भी है कि हम जागते हुए कितना 'जीवित' महसूस करते हैं 

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