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भारत में विश्वास तंत्र नहीं, बल्कि सत्य की खोज की परंपरा है: सद्गुरु

आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने बताया कि भारत की पहचान यहाँ की खोज परंपरा से है। उन्होंने आदियोगी द्वारा दिए गए 112 मार्गों का ज़िक्र करते हुए 'इनर इंजीनियरिंग' के महत्व को समझाया। उनके अनुसार, शाम्भवी महामुद्रा एक ऐसा आध्यात्मिक बीज है, जिसे यदि सही तरीके से पोषित किया जाए, तो वह व्यक्ति के जीवन में अद्भुत और कल्याणकारी बदलाव ला सकता है। यह अभ्यास व्यक्ति को उसकी परम प्रकृति से जोड़ने का एक वैज्ञानिक मार्ग है।

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भारत में विश्वास तंत्र नहीं, बल्कि सत्य की खोज की परंपरा है: सद्गुरु

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • भारत में विश्वास तंत्र नहीं, बल्कि सत्य की खोज की परंपरा है
  • शाम्भवी महामुद्रा एक बीज है
  • मानव कल्याण के लिए 112 वैज्ञानिक मार्ग

आध्यात्मिक गुरु और ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु ने हाल ही में भारत की आध्यात्मिक विरासत और आंतरिक विकास के विज्ञान पर अपने विचार साझा किए हैं। सद्गुरु के अनुसार, भारत केवल एक भौगोलिक देश नहीं है, बल्कि यह साधकों की भूमि है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि हमारे पास कोई निश्चित Belief system नहीं है, बल्कि हम सत्य की खोज को एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखते हैं।

आदियोगी के 112 मार्ग और आंतरिक विज्ञान

सद्गुरु ने बताया कि हज़ारों साल पहले आदियोगी ने 112 ऐसे तरीके दिए थे, जिनसे एक व्यक्ति अपनी Ultimate Nature को प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह बाहरी दुनिया और भौतिक सुख-सुविधाओं को संभालने के लिए ऑब्जेक्टिव साइंस है, उसी तरह हमारे आंतरिक जीवन और चेतना को समझने के लिए एक सब्जेक्टिव साइंस की आवश्यकता होती है।

इनर इंजीनियरिंग: स्वयं को जानने की कला

सद्गुरु के अनुसार, इनर इंजीनियरिंग इसी आंतरिक विज्ञान का सार है। यह केवल एक अभ्यास नहीं है, बल्कि स्वयं को गहराई से समझने की प्रक्रिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल अभ्यास करने के बारे में नहीं है, बल्कि इसे अपने भीतर एक जीवंत शक्ति के रूप में महसूस करने के बारे में है।

शाम्भवी महामुद्रा

वीडियो में सद्गुरु ने शाम्भवी महामुद्रा  के महत्व पर विशेष चर्चा की। उन्होंने इसकी तुलना एक 'बीज' से की। सद्गुरु ने कहा, "शाम्भवी महामुद्रा एक बीज की तरह है। यदि आप इसे सही तरीके से पोषित करते हैं, तो यह एक विशाल वृक्ष बन जाएगा और आपके जीवन में ऐसे फल देगा जिनकी आप अभी कल्पना भी नहीं कर सकते।"

उन्होंने साधकों को प्रेरित करते हुए कहा कि आध्यात्मिक विकास कोई रातों-रात होने वाला चमत्कार नहीं है, बल्कि यह निरंतर अभ्यास और आंतरिक जागरूकता का परिणाम है। जब इंसान अपनी आंतरिक इंजीनियरिंग को सही कर लेता है, तो जीवन का अनुभव पूरी तरह से बदल जाता है।

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