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सद्गुरु: मौन चुप रहने में नहीं, बल्कि हर बात पर रिएक्ट न करने में है
सद्गुरु ने 'मौन' की एक नई और गहरी परिभाषा साझा की है। उनका कहना है कि चुप बैठने पर भी दिमाग में शोर हो सकता है। असली मौन तब घटित होता है जब हम बाहरी आवाज़ों और अपने भीतर उठने वाले विचारों पर प्रतिक्रिया देना बंद कर देते हैं। हर परिस्थिति को बिना किसी विरोध के स्वीकार करना ही हमारे मन को शांत करता है। यह अवस्था व्यक्ति को तनावमुक्त कर ब्रह्मांड से जोड़ती है।
सद्गुरु: मौन चुप रहने में नहीं, बल्कि हर बात पर रिएक्ट न करने में है
Photo Credit: Instagram
- विचारों का 'शोर' तब शांत होता है जब आप उन्हें सिर्फ ऑब्ज़र्व करते हैं
- परिस्थितियों को बिना विरोध के स्वीकार करना ही असली 'मौन' है: सद्गुरु
- सद्गुरु: मौन चुप रहने में नहीं, बल्कि हर बात पर रिएक्ट न करने में है
आध्यात्मिक गुरु और Motivational Speaker सद्गुरु अक्सर जीवन, ध्यान और मन की शांति से जुड़े गहरे विषयों को बेहद सरल तरीके से समझाते हैं। हाल ही में उन्होंने मौन को लेकर एक ऐसा नज़रिया पेश किया है जो हमारी आम समझ से बिल्कुल अलग है। सद्गुरु के अनुसार, मौन कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे आप ज़बरदस्ती "करते" हैं, बल्कि यह एक ऐसी अवस्था है जो आपके भीतर स्वाभाविक रूप से तब आती है, जब आप अपने आस-पास और अपने अंदर की चीज़ों पर प्रतिक्रिया देना बंद कर देते हैं।
मौन सिर्फ चुप बैठना नहीं है
सद्गुरु कहते हैं कि हम अक्सर सोचते हैं कि मौन का मतलब कुछ न बोलना या चुपचाप बैठना है, लेकिन ऐसा नहीं है। आप चुपचाप बैठ सकते हैं, लेकिन फिर भी आपके दिमाग के अंदर बहुत शोर हो सकता है। उनके अनुसार"असली मौन ध्वनि को रोकने के बारे में नहीं है, यह ध्वनि पर आपकी प्रतिक्रिया को रोकने के बारे में है।"
हमारे आस-पास हमेशा कई तरह की आवाज़ें होती हैं जैसे ट्रैफिक, लोगों की बातचीत या रोज़मर्रा का शोर। लेकिन ये आवाज़ें 'शोर' तभी बनती हैं जब हम उन पर प्रतिक्रिया देते हैं या उनसे चिढ़ते हैं। अगर हम प्रतिक्रिया न दें, तो वे महज़ आवाज़ें ही रहती हैं और हमें परेशान नहीं करतीं।
आपके अपने विचार भी बन सकते हैं शोर
ठीक यही स्थिति हमारे अंदर भी होती है। हमारे विचार और भावनाएं भी एक तरह का शोर बन सकते हैं। जब हम अपने हर विचार या भावना पर बार-बार प्रतिक्रिया करते हैं, तो यह मानसिक अशांति पैदा करता है। लेकिन अगर हम बस उन्हें ध्यान से देखें करें और उन पर कोई प्रतिक्रिया न दें, तो वे अपनी ताकत खो देते हैं और हम शांत महसूस करने लगते हैं।
ब्रह्मांड की गोद में होने का अहसास
सद्गुरु के अनुसार, मौन Complete Acceptance से आता है। जब आप हर चीज़ को बिना किसी विरोध के वैसे ही स्वीकार कर लेते हैं जैसी वह है, तो आपका मन स्वाभाविक रूप से शांत हो जाता है। आपको मौन रहने के लिए खुद से ज़बरदस्ती करने की कोई ज़रूरत नहीं पड़ती।
उन्होंने मौन को ब्रह्मांड की गोद में होने के रूप में भी वर्णित किया है। इसका अर्थ है बिना किसी आंतरिक संघर्ष के बेहद शांतिपूर्ण, जुड़ा हुआ और तनावमुक्त महसूस करना। यह सृजन के स्रोत के करीब होने जैसा है।
आसान शब्दों में कहें तो, सद्गुरु का संदेश यह है कि 'मौन' पहले से ही आपके भीतर मौजूद है। आपको इसे बाहर से बनाने या ढूंढने की जरूरत नहीं है। आपको बस अपनी प्रतिक्रियाएं रोकनी हैं, जीवन को वैसे ही स्वीकार करना है जैसा वह है, और खुद को उस प्राकृतिक शांति का अनुभव करने देना है।
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