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घर खरीदना इन्वेस्टमेंट है या वित्तीय बोझ? जानिए मशहूर फाइनेंस इन्फ्लुएंसर के 3 जरूरी नियम

क्या साल 2026 में अपना घर खरीदना एक समझदारी भरा वित्तीय फैसला है? मशहूर फाइनेंस इन्फ्लुएंसर प्रांजल कामरा ने 'किराया बनाम खरीद' की उलझन को सुलझाते हुए 3 खास नियम बताए हैं। प्रांजल के अनुसार, सामाजिक दबाव में आकर बड़ा होम लोन लेने के बजाय अपनी आय, करियर की स्थिरता और बजट को ध्यान में रखकर ही घर खरीदने या किराए पर रहने का स्मार्ट निर्णय लेना चाहिए।

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घर खरीदना इन्वेस्टमेंट है या वित्तीय बोझ? जानिए मशहूर फाइनेंस इन्फ्लुएंसर के 3 जरूरी नियम

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • प्रांजल कामरा ने बताया किराया बनाम खरीद का सही गणित
  • होम लोन की ईएमआई आय के 30 फीसदी से कम रखें
  • करियर में लंबी स्थिरता होने पर ही खरीदें अपना मकान

पीढ़ियों से अपना खुद का घर खरीदना कामयाबी की सबसे बड़ी निशानी माना जाता रहा है। लेकिन आज के समय में, जहां बार-बार नौकरियां बदलना, रिमोट वर्क  और पैसों की तरलता अधिक महत्वपूर्ण हो चुकी है, यह फैसला अब इतना सीधा नहीं रह गया है। जाने-माने फाइनेंस इन्फ्लुएंसर प्रांजल कामरा ने इस 'किराया बनाम खरीद' की बहस पर अपने विचार साझा किए हैं। उनका कहना है कि घर खरीदने का फैसला सामाजिक दबाव में नहीं, बल्कि व्यावहारिकता के आधार पर होना चाहिए।

घर सिर्फ एक निवेश नहीं, एक बड़ी जिम्मेदारी है

अक्सर लोग घर को विशुद्ध रूप से एक निवेश  के रूप में देखते हैं, लेकिन प्रांजल कामरा का मानना है कि घर को सबसे पहले आपकी जिंदगी का एक अहम मकसद पूरा करना चाहिए। घर सिर्फ कागज पर दिखने वाली कोई संपत्ति नहीं है; इसके साथ हर महीने और हर साल मेंटेनेंस का खर्च, प्रॉपर्टी टैक्स, मरम्मत की लागत और एक लंबा वित्तीय कमिटमेंट जुड़ा होता है। अगर आप सिर्फ इसलिए घर ले रहे हैं क्योंकि रियल एस्टेट की कीमतें बढ़ती हैं, तो आप इसके साथ आने वाले वित्तीय बोझ को नजरअंदाज कर रहे हैं।

करियर में स्थिरता होने पर ही खरीदें मकान

प्रांजल के मुताबिक, घर खरीदने से पहले खुद से स्थिरता को लेकर सवाल पूछना सबसे जरूरी है। अगर आपको पूरा भरोसा है कि आप अगले 15 से 20 सालों तक उसी शहर और उसी इलाके में रहने वाले हैं, तभी घर खरीदना समझदारी है। अगर आपके करियर, बिजनेस या व्यक्तिगत कारणों से आपको दूसरे शहर जाना पड़ सकता है, तो किराए पर रहना कहीं अधिक बेहतर विकल्प है। बड़े होम लोन की ईएमआई  युवाओं के करियर के विकल्पों को बांध देती है।

प्रांजल कामरा का '30% ईएमआई नियम'

बजट और वहनीयता को ध्यान में रखते हुए प्रांजल ने एक आसान नियम सुझाया है। आपके होम लोन की मासिक किस्त आपकी कुल घरेलू आय के 30% से अधिक नहीं होनी चाहिए। जब आपकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा ईएमआई में चला जाता है, तो इमरजेंसी फंड, रिटायरमेंट प्लानिंग, शेयर बाजार में निवेश और यात्रा जैसे अन्य वित्तीय लक्ष्य पीछे छूट जाते हैं। यदि बजट पर बहुत अधिक दबाव पड़ रहा है, तो किराए पर रहना और बाकी बचे पैसों को अन्य जगह निवेश करना ज्यादा स्मार्ट फैसला है।

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