Whosthat360Hindi
हिंदी संस्करण
Advertisement

मन में उठने वाले विचारों पर सद्गुरु का बड़ा बयान; जानिए कैसे जीवन को बना सकते हैं सुंदर

आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने इंसानी दिमाग और विचारों के प्रबंधन पर एक अनमोल विचार साझा किया है। आदियोगी प्रतिमा के सामने से दिए इस संदेश में उन्होंने बताया कि हमारा दिमाग समाज के कचरे को ग्रहण करता रहता है। हालांकि, इस कचरे को प्रतिक्रिया देकर खुद को कूड़ेदान बनाना है या इसे खाद बनाकर जीवन में सुंदर फूल खिलाने हैं, यह पूरी तरह हमारी पसंद है।

Sadhguru,Sadhguru  instagram,Sadhguru  latest updates

मन में उठने वाले विचारों पर सद्गुरु का बड़ा बयान; जानिए कैसे जीवन को बना सकते हैं सुंदर

Photo Credit: Instagram

ख़ास बातें
  • सद्गुरु ने दिमाग को समाज का कूड़ेदान बताया
  • ज्ञानेंद्रियों के जरिए हर तरह का डेटा जाता है अंदर
  • मानसिक कचरे से बनाएं सुंदर फूल जैसी जिंदगी

ईशा फाउंडेशन के संस्थापक और आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने सोशल मीडिया पर एक प्रेरणादायक वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में वे कोयंबटूर स्थित 'आदियोगी शिव' की विशाल प्रतिमा के सामने बैठे नजर आ रहे हैं। नीले रंग के कुर्ते, चश्मे और हैट पहने हुए सद्गुरु ने इंसानी दिमाग की कार्यप्रणाली और समाज के उस पर पड़ने वाले प्रभाव पर एक बहुत ही गहरी और व्यावहारिक बात कही है।

दिमाग समाज का कूड़ेदान है 

सद्गुरु ने वीडियो की शुरुआत में एक चौंकाने वाला लेकिन सच बयान देते हुए कहा, "हमारा दिमाग समाज का कूड़ेदान है"। उन्होंने इसके पीछे का तर्क समझाते हुए कहा कि समाज में हमारे आसपास से जो कोई भी गुजरता है, वह हमारे दिमाग में कुछ न कुछ कचरा (विचार, बातें या धारणाएं) डाल देता है। हमारी आंखें, कान, नाक, जीब और त्वचा यानी हमारी ज्ञानेंद्रियां हमेशा खुली रहती हैं। केवल आंखों को छोड़कर, हमारी अन्य इंद्रियों को हम अपनी मर्जी से बंद नहीं कर सकते। इसलिए, हमारे आसपास जो कुछ भी घटित होता है, वह सब कुछ अनचाहे ही हमारे दिमाग के भीतर चला जाता है।

कंटेंट पर हमारा नियंत्रण नहीं, लेकिन इस्तेमाल पर है

सद्गुरु के अनुसार, हमारे दिमाग के अंदर किस तरह की बातें या कंटेंट प्रवेश कर रहा है, इस पर हमारा कोई नियंत्रण या पसंद नहीं होती है। हम जो देखते हैं, सुनते हैं या महसूस करते हैं, वह सब हमारे भीतर दर्ज होता जाता है। लेकिन, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम उस डेटा या जानकारी का उपयोग कैसे करते हैं, वह पूरी तरह से हमारे हाथ में है। हम जीवन को किस संदर्भ में देखते हैं, यह पूरी तरह हमारा अपना फैसला होता है।

कचरे को खाद बनाएं, खुद को कूड़ेदान नहीं

सद्गुरु ने जीवन को बेहतर बनाने का एक बेहतरीन सूत्र देते हुए कहा कि हमारे पास दो विकल्प हैं। पहला यह कि हम अपने भीतर जाने वाले इस सारे सामाजिक कचरे के प्रति प्रतिक्रिया  दें और खुद को भी एक कूड़ेदान बना लें। दूसरा विकल्प यह है कि हम इस पूरे डेटा को प्रोसेस करें, इसकी अच्छी खाद  बनाएं और अपने जीवन को सुंदर फूलों और फलों की तरह खिलाएं। अंत में उन्होंने हाथ जोड़कर प्रार्थना की मुद्रा में संदेश दिया कि आपके जीवन में क्या परिस्थितियां या बातें आ रही हैं, इसके लिए कभी दूसरों को दोष न दें। महत्वपूर्ण यह है कि आपने उन परिस्थितियों से अपने लिए क्या बनाया है।

For the latest Influencer News and Interviews, follow WhosThat360 on X, Facebook, Instagram and Threads. For the latest interview videos, subscribe to our YouTube channel.

Further reading: Sadhguru

संबंधित ख़बरें