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Joe rogan के पॉडकास्ट में छाए सद्गुरु; फनी इंटरनेट मीम से समझाया जीवन का कड़वा सच

आध्यात्मिक गुरु सदगुरु ने जो रोगन के पॉडकास्ट पर एक मीम के माध्यम से जीवन का एक बड़ा सबक साझा किया। उन्होंने बताया कि इस विशाल ब्रह्मांड में मनुष्य की हैसियत महज एक धूल के कण जैसी है। समस्या तब होती है जब हम खुद को और अपनी छोटी समस्याओं को बहुत गंभीरता से लेने लगते हैं। सदगुरु के अनुसार, खुश रहने का तरीका यह है कि हम अपनी मृत्यु के प्रति सचेत रहें और जीवन का आनंद लें।

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सदगुरु ने जो रोगन के शो में वायरल मीम पर की चर्चा

Photo Credit: sadhguru instagram

ख़ास बातें
  • खुद को बहुत ज्यादा गंभीर न लेने की दी सलाह
  • मौत की सच्चाई को स्वीकारना ही खुशी का राज है
  • सदगुरु ने जो रोगन के शो में वायरल मीम पर की चर्चा

क्या आप भी कभी-कभी अपनी छोटी-छोटी परेशानियों को लेकर बहुत ज़्यादा परेशान हो जाते हैं? आध्यात्मिक गुरु और ग्लोबल इन्फ्लुएंसर सदगुरु ने एक वायरल मीम के ज़रिए हमें याद दिलाया है कि हम इस विशाल ब्रह्मांड में कितने छोटे हैं और अपनी समस्याओं को गंभीरता से लेना क्यों बंद करना चाहिए। यह बातचीत जितनी गहरी थी, उतनी ही दिलचस्प भी।

जब सदगुरु ने देखा एक वायरल मीम

दुनिया के सबसे लोकप्रिय पॉडकास्ट 'द जो रोगन एक्सपीरियंस' में सदगुरु ने शिरकत की। यहाँ बातचीत सिर्फ आध्यात्म तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें इंटरनेट कल्चर का भी तड़का लगा। जो रोगन ने सदगुरु को एक मीम दिखाया जिसमें मिल्की वे गैलेक्सी के एक छोटे से हिस्से को पॉइंट करते हुए लिखा था, "आप यहाँ हैं, काम पर जाने से पहले शावर में रो रहे हैं।" इस पर सदगुरु की हंसी और फिर उनकी गहरी बात ने सबका दिल जीत लिया। उन्होंने कहा कि यह हमारे अस्तित्व की एक बड़ी और कड़वी सच्चाई है।

हम खुद को ब्रह्मांड का केंद्र क्यों मानते हैं?

सदगुरु ने मुस्कुराते हुए समझाया कि इस ब्रह्मांड के मुकाबले हम एक सूक्ष्म कण के बराबर भी नहीं हैं। इसके बावजूद, हर इंसान को ऐसा लगता है कि पूरी दुनिया उसी के इर्द-गिर्द घूम रही है। उन्होंने इसे एक 'सीरियस इश्यू' बताया। जब हम खुद को ब्रह्मांड का केंद्र समझने लगते हैं, तो हमारी चिंताएं और दुख भी हमें पहाड़ जैसे लगने लगते हैं। यही कारण है कि आज के दौर में लोग छोटी-छोटी बातों पर भी बहुत जल्दी मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं।

आपका अस्तित्व एक अनोखा उपहार है

सदगुरु के अनुसार, यह प्रकृति की महानता है कि इतने विशाल ब्रह्मांड में होने के बावजूद, आपको एक अलग पहचान और व्यक्तिगत अनुभव मिला है। यह सबसे बड़ा गिफ्ट है कि हम यहाँ बैठकर सितारों और गैलेक्सी के बारे में सोच सकते हैं। बिना यह जाने कि यह सब कहाँ से शुरू हुआ और कहाँ खत्म होगा, हम इसका हिस्सा हैं। इसे महसूस करना ही जीवन की असली खूबसूरती है।

जीवन की सीमित समय सीमा और समाधान

इस समस्या का हल क्या है? सदगुरु ने बहुत ही सादगी से जवाब दिया कि हमें बस अपनी नश्वरता का एहसास होना चाहिए। हमारा समय यहाँ बहुत सीमित है। यदि हम हर पल यह याद रखें कि हम हमेशा यहाँ नहीं रहने वाले, तो हम अपनी परेशानियों को इतनी गंभीरता से नहीं लेंगे। तब हम जीवन का उसी रूप में आनंद ले पाएंगे जैसा वह है - एक अद्भुत सफर।

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