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मटन-चिकन नहीं, अब चखें त्रिपुरा के शाकाहारी व्यंजनों का देसी स्वाद
ओरिफ्लेम द्वारा प्रस्तुत 'Whosthat360 नॉर्थ-ईस्ट इन्फ्लुएंसर यात्रा' त्रिपुरा पहुँची। यहाँ कंटेंट हेड जयवीर सिंह ने राज्य के अनछुए शाकाहारी व्यंजनों को खोजा। उन्होंने गुदोक, चाखवी और मुया अवांद्रु जैसे पारंपरिक व्यंजनों के सोंधे और ताज़ा स्वाद का अनुभव साझा किया। जयवीर के अनुसार, त्रिपुरा का शाकाहारी भोजन भले ही कम चर्चित हो, लेकिन यह अपनी जड़ों से गहराई से जुड़ा और रूह को सुकून देने वाला है।
मटन-चिकन नहीं, अब चखें त्रिपुरा के शाकाहारी व्यंजनों का 'देसी' स्वाद
Photo Credit: Instagram
- त्रिपुरा का शाकाहारी स्वाद
- गुदोक और चाखवी का जादू! नॉर्थ-ईस्ट यात्रा में दिखा त्रिपुरा का वेज स्वैग
- बांस की कोपलों और सोंधी चटनी का मज़ा
'ओरिफ्लेम' द्वारा प्रस्तुत 'Whosthat360 नॉर्थ-ईस्ट इन्फ्लुएंसर यात्रा' इन दिनों त्रिपुरा की वादियों में है। अक्सर पूर्वोत्तर के राज्यों को उनके नॉन-वेज पकवानों के लिए जाना जाता है, लेकिन यहाँ का शाकाहारी भोजन भी स्वाद और परंपरा का एक अनूठा संगम है। इस यात्रा के दौरान Whosthat360 के कंटेंट हेड जयवीर सिंह ने त्रिपुरा के उन पारंपरिक शाकाहारी व्यंजनों को खोज निकाला है जो सादगी और सोंधी महक से भरे हुए हैं।
गुदोक: मिट्टी की सोंधी महक वाला 'सोल बाउल'
त्रिपुरा के सबसे पारंपरिक व्यंजनों में से एक है गुदोक। जयवीर सिंह बताते हैं कि इसका शाकाहारी संस्करण मौसमी सब्जियों और कुछ खास फर्मेंटेड तत्वों से तैयार किया जाता है। इसकी खासियत यह है कि इसमें भारी मसालों का उपयोग नहीं होता; बल्कि धीमी आंच पर पकी सब्जियों का प्राकृतिक और मिट्टी जैसा स्वाद उभर कर आता है। लंबे सफर की थकान के बाद यह एक संपूर्ण और पौष्टिक भोजन साबित होता है।
चाखवी और मुया अवांद्रु: बांस की कोपलों का जादू
त्रिपुरा के खाने में बांस की कोपलों का इस्तेमाल बहुत अहम है। जयवीर ने चाखवी को एक 'मेडिटेटिव' डिश बताया, जो बहुत हल्की और सुकून देने वाली होती है। वहीं, मुया अवांद्रु उन लोगों के लिए है जिन्हें थोड़ा तीखा और खट्टा स्वाद पसंद है। फर्मेंटेड बांस की कोपलों का यह स्वाद एक बार जुबां पर चढ़ जाए, तो उसे भूलना मुश्किल है।
मोसदेंग सेर्मा और भांगुई: सादगी में ही असली मज़ा
टमाटर से बनी साधारण चटनी मोसदेंग सेर्मा ने जयवीर को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। धुएँ के स्वाद वाली यह ताज़ा चटनी चावल के साथ एक बेहतरीन जुगलबंदी बनाती है। वहीं, भांगुई यहाँ का रोजमर्रा का सुगंधित चावल है, जो सादे भोजन को भी खास बना देता है।

जड़ों से जुड़ा हुआ खान-पान
जयवीर सिंह का निष्कर्ष यह है कि त्रिपुरा का शाकाहारी भोजन भले ही दुनिया के सामने उतना चर्चित न हो, लेकिन यह बेहद ईमानदार और अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है। यह साबित करता है कि किसी भी व्यंजन को प्रभावशाली बनाने के लिए जटिल मसालों की नहीं, बल्कि सही सामग्री और परंपरा की ज़रूरत होती है। नॉर्थ-ईस्ट यात्रा के ये स्वाद न केवल पेट भरते हैं, बल्कि त्रिपुरा की संस्कृति की एक अनकही कहानी भी बयां करते हैं।
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